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कृष्णा जन्म/अवतार  की प्रचलित धार्मिक मान्यता | कृष्णा जन्माष्टमी Krishna Janmashtami 2021

कृष्णा जन्म/अवतार की प्रचलित धार्मिक मान्यता | कृष्णा जन्माष्टमी Krishna Janmashtami 2021

 कृष्णा जन्म/अवतार  की प्रचलित धार्मिक मान्यता | कृष्णा जन्माष्टमी Krishna Janmashtami 2021




कृष्णा जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) यानि की भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन कुछ लोग इसे Janmashtami या Gokulashtami के नाम से भी जानते हैं  भगवान श्री कृष्णा , विष्णु के आठवे अवतार (Eighth avatar of Vishnu) के रूप में माने जाते हैं, मान्यता है की भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए दस अवतार लिए थे, सत्य युग(Satya Yuga.) की शुरुवात में मत्स्य अवतार (Matsya Avatar ),  कुर्मा अवतार (Kurma Avatar ), वराह अवतार (Varaha avatar ),  नरसिंहा अवतार (  Narasimha Avatar ), वामन अवतार (Vamana Avatar ), परशुराम अवतार  (Parashurama Avatar ), भगवान राम अवतार (Rama Avatar ), और आठवें भगवान कृष्णा अवतार (Lord krishna अवतार ) जबकि नवें अवतार के रूप में भगवान कृष्णा के भाई भगवान बलराम (Balarama) को माना जाता है , वहीं दसवें अवतार के लिए यह मान्यता प्रचलित है की भगवान विष्णु सफेद घोड़े पर सवार होकर मानव जाति में मौजूद बुराई को नष्ट करने के लिए कल्कि (Kalki ) अवतार धारण करेंगे । 




कब और क्यों मनाई जाती है कृष्णा जन्माष्टमी (When and why Krishna Janmashtami celebrated)-


कृष्णा जन्माष्टमी, भगवान कृष्णा के जन्मदिन को Raksha Bandhan के आठ दिन बाद मनाया जाता है, रक्षा बंधन  भाई-बहनों के बीच  पवित्र बंधन का त्योहार है। जन्माष्टमी श्रावण मास (हिंदू महीने) में पड़ता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर से आता  है। एक अन्य मान्यता के अनुसार  जन्माष्टमी के अष्ठमी यानि आठवें नंबर का कृष्ण कथा में एक और महत्व है कि श्री कृष्णा अपनी मां देवकी की आठवीं संतान थे। जिस कारण भी उनके जन्मदिवस को जन्माष्टमी कहते हैं। 



भगवान विष्णु के कृष्णा जन्म/अवतार  की प्रचलित धार्मिक मान्यता (Popular religious belief of Krishna avatar of Lord Vishnu) -


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने  द्वापरयुग में क्रूर कंस के वध के लिए कृष्णा अवतार या पूर्णावतार (Poornavatar) लिया , कृष्ण माता देवकी और वासुदेव के पुत्र थे। कंस बेहद क्रूर और अधर्मी राजा था जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता था, कंस ने वासुदेव के साथ अपनी बहन देवकी का विवाह किया लेकिन शादी के बाद जब कंस देवकी, वासुदेव से विदाई लेने वाले थे, तो अचानक आकाशवाणी हुई कि वह देवकी के आठवें पुत्र द्वारा मारा जाएगा।


यह सुनकर दुष्ट कंस ने विवाह रथ में कदम रखा और देवकी को अपनी तलवार से मारने की कोशिश की लेकिन वासुदेव ने उसे रोक दिया। वासुदेव क्षमा याचना कर उसे यह कहते हुए मना लिया कि वे अपना आठवां बच्चा कंस को सौंप देगा, लेकिन कंस ने देवाकी और वासुदेव को कैद कर लिया, जब कंस के पिता राजा उग्रसेन ने उसे ऐसा न करने को कहा तो दुष्ट कंस ने अपने पिता उग्रसेन को भी कैद कर लिया। वह  बारी-बारी से, साल दर साल देवाकी और वासुदेव के छह बेटों को निर्दयता से मार देता है।


अब देवकी सातवीं संतान के साथ गर्भवती थी। भगवान विष्णु ने देवी महामाया को बुलाया और देवकी के गर्भ में सातवें बच्चे को रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित करने के लिए कहा। (रोहिणी वसुदेव की पहली पत्नी थीं, वसुदेव की चार पत्नियां देवकी, रोहिणी, भद्रा और मदिरा थी ) देवी महामाया ने रोहिणी के गर्भ में देवकी के सातवें बच्चे को स्थानांतरित कर दिया, यह सातवां बच्चा भगवान बलराम थे जो माता यशोधा और नंदा राज के साथ गोकुल में पले बड़े( नंदराज वासुदेव के भाई थे )।


कुछ वर्ष बाद माता देवकी ने अपने आठवे पुत्र कृष्णा को अष्टमी की मध्य रात्रि को जन्म दिया।  पौराणिक कथाओं के अनुसार  उस रात तीव्र वर्षा हो रही थी कारगर के सभी रक्षक सो रहे थे तभी अचानक वासुदेव की जंजीर टूट गई और जेल के दरवाजे खुद ही खुल गए , वासुदेव बालक कृष्णा को ले कर गोकुल की ओर चल पड़े। गोकुल पहुंचने के लिए यमुना नदी को पर करना था लेकिन  यमुना नदी जल स्तर  उफान पर था, पानी बेतहाशा बह रहा था, वासुदेव ने इसे पार करने के लिए नदी में कदम रखा। वासुदेव की नाक तक पानी का स्तर ऊंचा उठ गया,मानो ऐसा लगता प्रतीत हो रहा था जैसे यमुना नदी भगवान कृष्ण को छूने के लिए उत्सुक थी।


जैसे ही बाल कृष्ण ने अपने पैर से नदी को स्पर्श किया  जल स्तर गिरने लगा व वशुदेव को रास्ता देने लगी। 

वासुदेव जब नंदराज के घर पहुंचे तो नंदराज की पत्नी यशोदा ने एक बच्ची को जन्म दिया, वासुदेव ने यशोदा व नंदराज से पूरी कहानी उन्हें बताई तब यशोदा व नंदराज ने  वासुदेव से कहा कि वह उनकी बेटी को अपने साथ ले जाएँ ताकि कंस को शक न हो। 



इस बार(2021) क्या खास है कृष्णा जन्माष्टमी में , कब है जन्माष्टमी, जन्माष्टमी की तारीख  (What is special in Krishna Janmashtami 2021, when is Janmashtami , Janmashtami Date 2021)-


भारत जैसे धार्मिक और त्यौहारों के देश में हर वर्ष ही कृष्णा जन्माष्टमी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है लेकिन इस बार हम सभी जानते हैं की कोरोना महामारी के चलते इस त्यौहार के वे रंग सायद ही देखने को मिले जो हर बीते सालों में और भी निखरते जाते हैं लेकिन आप सभी अपने घर  में ही रह कर जन्माष्टमी मना सकते हैं इसके अलावा जो लोग घरों से बाहर भी आते आये तो उनको अपना और अपनों का ध्यान जरूर रखें। 



कृष्ण जन्माष्टमी 2021 भारत में तिथि ( Krishna Janmashtami 2020 Date In India )-


इस साल जन्माष्टमी (Janamashtami 2021) का त्योहार 30 August अगस्त को मनाया जाएगा , यानि की दो तिथियां है जिससे लोगों के बीच संशय बना हुआ है, हालाँकि  मथुरा में ब्रज सहित देश और विदेश  के विभिन क्षेत्रों में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त को मनाया जाएगा, वहीं नन्दगांव में एक दिन पूर्व इसका आयोजन किया जाएगा। 


Happy Krishna Janmashtami 2021 Wishes, Messages, Quotes, Greetings (हैप्पी कृष्णा जन्माष्टमी 2021 की शुभकामनाएं, संदेश, कोट्स  शुभकामनाएं)-






फिर से कृष्ण जन्माष्टमी आई है


माखन की हांडी ने फिर मिठास बढ़ाई है,


कन्‍हैया की लीला है सबसे प्यारी


वो दे तुम्हें दुनिया भर की खुशियां सारी।


हैप्पी जन्माष्टमी 2021



 


आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की


नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की...


कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं



 


बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की


हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की


कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं



 

The one who ate the butter,


Who danced by playing flute.


Celebrate her birthday,


Who showed the world the way of love


Happy janmashtami 2021

 

 



On this occasion of Janmashtami, we wish that


May the grace of Shri Krishna be with you, and your entire family forever.


Happy janmashtami 2021 

 



With my kindness, everything is working,


You do Kanhaiya, my name is happening.


Without the rudder, my boat is moving,


Just keep happening always, whatever is happening.


Best wishes to Krishna Janmashtami




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